नवरात्रि विशेष 2020 : नवरात्रि पर इस बार दुर्लभ संयोग, 1962 में बना था ऐसा संयोग, कल सुबह 9:45 तक कर लें घट स्थापना

धर्म डेक्स। आदिशक्ति मां दुर्गा की उपासना का पावन पर्व शारदीय नवरात्र शनिवार 17 अक्तूर से शुरू होगा। इसके साथ ही मलमास का समापन हो जाएगा। नवरात्र का शुभारंभ इस बार दुर्लभ संयोग के साथ होगा। इसलिए ग्रहीय दृष्टि से शारदीय नवरात्र शुभ और कल्याणकारी होगा। नवरात्र के दौरान नौ दिनों तक घरों, मन्दिरों में विधिविधान से पूजन अर्चन कर भक्त मां भगवती आशीष प्राप्त करेंगे। नवरात्र को लेकर मन्दिरों में सरकार की गाइड लाइन के अनुसार सिद्धपीठ ललिता देवी, कल्याणी देवी और अलोपशंकरी मंदिर में पूजन-अर्चन की तैयारी की गई है।

  • मिट्टी का कलश- कलश स्थापना के लिए
  • आम के हरे पत्ते
  • दूर्वा
  • पंचामृत की सामग्री
  • अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य
  • देवी की प्रतिमा
  • देसी घी अखंड ज्योति जलाने के लिए। कहते हैं नौ दिनों तक अंखड ज्योति के रूप में माता रानी आपके घर में विराजमान रहती है।
  • लाल चुनरी
  • लाल वस्त्र

श्रृंगार का सामान

  • कुमकुम
  • फूल और माला
  • पान,सुपारी, लौंग-इलायची, बताशे, कपूर, उपले, फल-मिठाई, कलावा और मेवे पूजा की सामग्री

कलश स्थापना शुभ समय

  • घट स्थापना का सबसे शुभ समय प्रतिपदा का एक तिहाई भाग बीत जाने के बाद होता है। अगर किसी कारणवश आप उस समय कलश स्थापित न कर पाएं, तो अभिजीत मुहूर्त में भी स्थापित कर सकते हैं। प्रत्येक दिन का आठवां मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त कहलाता है। यह 40 मिनट का होता है। हालांकि, इस बार घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
  • कलश स्था‍पना की तिथि और शुभ मुहूर्त
  • कलश स्था‍पना की तिथि: 17 अक्टूबर 2020
  • कलश स्था‍पना का शुभ मुहूर्त: 17 अक्टूबर 2020 को सुबह 06 बजकर 23 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक।
  • कुल अवधि: 03 घंटे 49 मिनट

कलश स्थापना कैसे करें

  • नवरात्रि के पहले दिन यानी कि प्रतिपदा को सुबह स्नान कर लें।
  • मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद सबसे पहले गणेश जी का नाम लें और फिर मां दुर्गा के नाम से अखंड ज्योत जलाएं और कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं।
  • अब एक तांबे के लोटे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं। लोटे के ऊपरी हिस्सेे में मौली बांधें।
  • अब इस लोटे में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं। फिर उसमें सवा रुपया, दूब, सुपारी, इत्र और अक्षत डालें।
  • इसके बाद कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते लगाएं।
  • अब एक नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर उसे मौली से बांध दें। फिर नारियल को कलश के ऊपर रख दें।
  • अब इस कलश को मिट्टी के उस पात्र के ठीक बीचों बीच रख दें, जिसमें आपने जौ बोएं हैं।
  • कलश स्थाशपना के साथ ही नवरात्रि के नौ व्रतों को रखने का संकल्पब लिया जाता है।
  • आप चाहें तो कलश स्था पना के साथ ही माता के नाम की अखंड ज्योोति भी जला सकते हैं।

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