लुधियाना ब्लास्ट का आरोपी मुल्तानी जर्मनी से गिरफ्तार, दिल्ली और मुंबई को भी दहलाने की कर रहा था साजिश

नई दिल्‍ली। लुधियाना जिला न्यायालय परिसर विस्फोट मामले में पुलिस एवं जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है। इस बीच यूरोप के देश जर्मनी से खबर आई है कि, इस मामले से जुड़ा एक शख्‍स वहां गिरफ्तार कर लिया गया है। उसकी पहचान सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के एक प्रमुख सदस्य जसविंदर सिंह मुल्तानी के तौर पर हुई है, जो कथित तौर पर लुधियाना जिला न्यायालय परिसर विस्फोट कांड में शामिल है। पता चला है कि, जसविंदर सिंह मुल्तानी एसएफजे के सभी मुख्य सदस्यों के साथ संपर्क में रहा है। उसे जर्मनी में 27 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया और वहां उसकी गिरफ्तारी से अब मोदी सरकार के कूटनीतिक दबाव की तारीफ हो रही है।

अधिकारियों का कहना है कि, जसविंदर सिंह मुल्तानी एक कट्टरपंथी है। उसे भारत लाया जाएगा। बताया जा रहा है कि, मोदी सरकार ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से जर्मन पुलिस को कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी प्रदान की और यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के इशारे पर सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) आतंकी हमले की योजना बना रहा है। वहीं, उसके बाद जर्मन पुलिस द्वारा प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के कट्टरपंथी जसविंदर सिंह मुल्तानी की गिरफ्तारी की खबर आ गई।

जांच एजेसियों के मुताबिक, एसएफजे आतंकवादियों द्वारा मुंबई या दिल्ली को निशाना बनाए जाने की फिराक में था। हालांकि, मोदी सरकार द्वारा 72 घंटे से ज्‍यादा के प्रयास रंग लाए और नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि यदि मुंबई या दिल्ली में कोई बम विस्फोट होता है तो वह जर्मनी में बैठे एसएफजे सदस्‍यों को जवाबदेह ठहराएगा। बॉन और नई दिल्ली में मौजूद अधिकारियों के अनुसार, मोदी सरकार ने मामले की तात्कालिकता के बारे में संघीय पुलिस को समझाने के लिए दिल्ली और बॉन में जर्मन दूतावास को कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी प्रदान की। विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों द्वारा भारतीय दूतावास के अधिकारियों को उनकी क्रिसमस की छुट्टियों से वापस बुला लिया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जर्मन अधिकारी मुंबई पर हुए आतंकी हमले के मामले की गंभीरता को समझें। माना जा रहा है कि, मुल्तानी मुंबई में विस्‍फोटक भेजने की तैयारी में था और हमले के लिए एक आतंकवादी टीम को तैयार किया गया था।

अब एसएफजे के चरमपंथी से वर्तमान में जर्मन पुलिस पूछताछ कर रही है। हालांकि, अभी भारतीय सुरक्षा एजेंसियां ​​और विदेश मंत्रालय इस मामले पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। वैसे, जर्मन अधिकारियों द्वारा मुल्तानी की गिरफ्तारी द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़ा कदम है क्योंकि यह यूके और कनाडा जैसे देशों को सिख अलगाववादियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर करेगा, जिन्हें पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त है। भारत के रणनीतिक साझेदार होने के बावजूद, यूके और कनाडा की ओर से निष्क्रियता ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को निराश किया था। वहीं, मुल्तानी हाल ही में अपने पाकिस्तान स्थित गुर्गों और हथियार तस्करों की मदद से सीमा पार से विस्फोटक, हथगोले और पिस्तौल जैसे हथियारों की खेप की व्यवस्था और भेजने की तैयारी कर रहा था, जो कि सुरक्षा एजेंसियों के संज्ञान में आया है। वह तस्करी की खेपों का इस्तेमाल कर पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहा था।

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