कोरोना के बाद अब इबोला वायरस का आतंक, WHO ने दी चेतावनी

नई दिल्ली। जहां पूरी दुनिया अभी कोरोना वायरस से उबर भी नहीं पाई थी, वहीं अब इबोला वायरस ने भी डराना शुरू कर दिया है। दुनिया कोरोना वायरस महामारी से अभी उबर भी नहीं पाई थी कि अब इबोला वायरस ने भी दस्तक दे दी है। इबोला वायरस के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में छह नए मामले सामने आए हैं, जिसकी पुष्टि स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ-साथ WHO ने भी की है।

स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक पश्चिमी शहर मबंडाका में इबोला के छह नए मामले सामने आए हैं, जबकि चार लोगों की इससे मौत भी हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री इटेनी लोंगोंडो ने कहा कि इबोला वायरस से मबंडाका में चार लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में डॉक्टर्स की टीम और दवाइयां भेजी गई हैं। बता दें कि साल 2018 के बाद यह दूसरी बार है जब कांगो में इबोला वायरस के नए मामले सामने आए हैं।

WHO के महानिदेशक टेड्रोस ने कहा कि कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इबोला वायरस के नए मामलों की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि जिस शहर में इबोला वायरस के मामले मिले हैं, वहां कोरोना वायरस का अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि पूरे कांगो में कोरोना वायरस के 3,000 के करीब मामले सामने आ चुके हैं। टेड्रोस ने बताया कि कोरोना और इबोला का आपस में कोई संबंध नहीं है। हालांकि दोनों के लक्षणों में समानता है।

इबोला संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैलता है। इसके लक्षणों में अचानक बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश होना है। वहीं इसके बाद उल्टी होना, डायरिया और कुछ मामलों में अंदरूनी और बाहरी रक्तस्राव होना भी इसके लक्षण हैं। ज्यादा रक्तस्राव से व्यक्ति की मौत का खतरा भी बढ़ जाता है। इंसानों में इसका संक्रमण संक्रमित जानवरों, जैसे— चमगादड़, चिंपैंजी और हिरण आदि के संपर्क में आने से होता है।

इस वायरस की पहचान सबसे पहले साल 1976 में की गई थी। इसके बाद मार्च 2014 में पश्चिमी अफ्रीका में इसके नए मामले पाए गए। इस वायरस से अब तक 2275 लोगों की मौत हो चुकी है। इस वायरस को इबोला के नाम से कांगो में ही जाना जाता है और कांगो में ही इस वायरस से सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं।

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