भारत का ऐतिहासिक दिन-धारा 370 खत्म, अब कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक

15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआं। उसके बाद आज का दिन ऐतिहासिक है, जब कश्मीर से धारा 370 खत्म कर दिया गया। लम्बे समय से चल रहे विवाद अब खत्म कर दिया गया है, जिसमें कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक हो गया। सही कहा जाए तो भारत देश को पूरी आजादी आज ही मिली है। इस आजादी के लिए भारत के कितनों वीर जवानों एवं आम नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है। धारा 370 के कारण पाकिस्तान हमेशा भारत को नुकसान पहुंचाते आ रहे थे। इस निर्णय से आतंकवाद का अंत होगा। जम्मू-कश्मीर में तैनात जवानों के लिए बहुत बड़ा दिन है। अब पूरे देश में तिरंगा झंडा का सम्मान किया जाएगा। भारत देश के नागरिकों के लिए आज का दिन बहुत ही ऐतिहासिक और स्मरणीय रहेगा। लगातार प्रधानमंत्री के प्रयासो से अनेक ऐसे निर्णय लिए गए जिसमें वर्षो से एक चुनौती बनी हुई थी। पहले तीन तलाक खत्म और अब धारा 370 का खात्मा। भारत की जनता के लिए अच्छे दिनों की शुरूआत हो चुकी है।

स्वतंत्रता के समय जम्मू कश्मीर भारत के गणराज्य में शामिल नहीं था, लेकिन उसके सामने तो विकल्प थे वह या तो भारत या फिर पाकिस्तान में शामिल हो जाए। उस समय कश्मीर की मुस्लिम बहुल जनसंख्या पाकिस्तान से मिलना चाहती थी, लेकिन राज्य के अंतिम महाराजा हरिसिंह का झुकाव भारत के प्रति था। हरिसिंह ने भारत के साथ एक इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन नामक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद भारतीय संविधान की धारा 370 के तहत जम्मू कश्मीर को एक विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने शेख अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर का प्रधानमंत्री बनवा दिया था। वहां मुख्यमंत्री की बजाय प्रधानमंत्री और राज्यपाल की जगह सदर-ए-रियासत होता था। उल्लेखनीय है कि इसी कारण से कश्मीर का अपना एक अलग झंडा और प्रतीक चिन्ह भी था।

राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कश्मीर में लागू धारा 370 और 35ए को खत्म करने के प्रस्ताव को पेश किया गया, जिसके बाद राज्यसभा में प्रस्ताव पास होने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इसे मंजूरी दे दी, जिससे जम्मू कश्मीर से धारा 370 और 35ए को हटाया गया, इसके साथ ही लद्दाख को जम्मू और कश्मीर से अलग किया जाएगा। मोदी सरकार के नए फैसलों के मुताबिक जम्मू और कश्मीर को अब केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा, जहां विधानसभा भी होगी, इसके अलावा लद्दाख को भी केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है, हालांकि यहां विधानसभा नहीं होगी।

लद्दाख के अंतर्गत लेह और कारगिल भी आते हैं। मोदी सरकार के इस फैसले के बाद 59,196 वर्ग किलोमीटर में फैला लद्दाख अब जम्मू कश्मीर से मुक्त हो जाएगा। साल 2011 में जनगणना रिपोर्ट के मुताबिक वहां उस समय 2,74,289 लोगों की आबादी थी। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख अब पूरी तरह से केंद्र सरकार के नियंत्रण में आ जाएगा।

जम्मू-कश्मीर पर अनुच्छेद 370 खत्म होने से वे सभी सुविधाएं और कानून लागू होंगे जो पूरे भारत में लागू हैं। धारा 370 खत्म होने से कश्मीर में नागरिकों के पास एक नागरिकता होगी। जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उस महिला की जम्मू-कश्मीर की नागरिकता खत्म नहीं होगी। कश्मीरी महिला पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से शादी करती है, तो उसके पति को जम्मू-कश्मीर की नागरिकता नहीं मिलेगी। अनुच्छेद 370 के कारण कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भारतीय नागरिकता नहीं मिलेगी। पूरे भारत सहित जम्मू-कश्मीर का एक ही तिरंगा झंडा होगा। जम्मू-कश्मीर में भारत के लोग जमीन खरीद सकते हैं। कश्मीर में अल्पसंख्यक हिन्दूओं और सिखों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में सूचना का अधिकार (आरटीआई) लागू होगा। जम्मू-कश्मीर में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) लागू होगा। जम्मू-कश्मीर में पंचायत के पास सब अधिकार होंगे। जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होगा।

इस फैसले से जम्मू कश्मीर और लद्दाख में अमन-चैन और शांति आएगी। वहां के लोगों को नौकरी और अनेक सुविधाएं मिलेगी, जिससे वे वंचित हुआ करते थे। कश्मीर की जन्नत कहने वाली भूमि अब हमारी है। इसी तरह भारत देश को एक रक्षा सूत्र में बांधकर राजनीतिवाद, जातिवाद और क्षेत्रवाद को समाप्त कर एक साथ मिलकर देश की उन्नति और विकास के लिए कदम उठाये तो आने वाले समय में भारत देश एक सशक्त और विकासशील देशों में सबसे आगे होने से कोई नहीं रोक सकता। भारत माता की जय।

लेख:- तेजबहादुर सिंह भुवाल

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