महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की हत्या ‘हिंदू विरोधी सुनियोजित षड्यंत्र’ : विश्व हिंदू परिषद

नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद ने महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं और उनके चालक की निर्मम हत्या को ‘हिंदू विरोधी सुनियोजित षड्यंत्र’ बताया है। विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने गुरुवार को कहा कि इस घटना के कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इसलिए जांच और हत्यारों के साथ षड्यंत्रकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जरूरी है।

विहिप के महामंत्री ने पूछा है कि लॉकडाउन के दौरान 14 अप्रैल को गांव-गांव में बच्चे चुराने वाले गैंग की अफवाह किसने फैलाई? 3-4 दिन पहले ही आस-पास के क्षेत्र में मदद की सामग्री बांटने आए एक डॉक्टर तथा पुलिस अधिकारी के ऊपर हमला हुआ था। यह पता होते हुए भी, इस घटना के समय पर्याप्त पुलिस फोर्स क्यों नहीं भेजी गई? 16 अप्रैल की रात 9 बजे पहली बार साधुओं की गाड़ी को गांव में रोका गया और उनके साथ मारपीट हुई। गांव की सरपंच चित्रा चौधरी के समझाने के बाद मारपीट बंद हुई और उन्हें वन विभाग की चौकी में ले जाया गया। सूचना करने पर करीब एक घंटे बाद सशस्त्र पुलिस फोर्स आई भी तो केवल मूकदर्शक बनी रही।

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विहिप ने सवाल किया है कि जब मॉब लिंचिंग हो रही थी, उसको रोकने के लिए फायरिंग क्यों नहीं हुई? क्या किसी ने कुछ भी नहीं करने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया था? उसके बाद पुन: भारी भीड़ आस-पास के गांवों से एकत्र हो गई, जिसने दूसरी बार हमला किया और साधुओं की नृशंस हत्या हुई।

परांडे ने दिल्ली में कहा कि पुलिस ने जो प्राथमिकी लिखी है, उसमें साफ-साफ लिखा है कि पालघर की घटना ‘पूर्व नियोजित षड्यंत्र’ है, तो फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री गलतफहमी कहकर इस केस के महत्व को क्यों कम करना चाहते हैं?

विहिप ने आरोप लगाया है कि जो 5 प्रमुख आरोपी हैं, वे सभी वामपंथी हैं। महाराष्ट्र शासन इस मामले की जांच कराए और दोषियों को सजा दिलवाए।

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