काशी विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण से जुड़े मजदूरों पर पुष्प वर्षा और उनके साथ भोजन कर पीएम मोदी ने किया श्रम का सम्मान

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने काल भैरव मंदिर में पूजा अर्चना की और गंगा नदी में डुबकी लगाई। वह वहां से पवित्र गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर आए। इन सबके बीच प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के निर्माण कार्य में लगे मजदूरों पर पहले तो पुष्प वर्षा की और बाद में उनके साथ खाना खाया। अपने आप में प्रधानमंत्री की इस बात को लेकर खूब सराहना हो रही है। प्रधानमंत्री के साथ खाना खाकर यहां काम करने वाले मजदूर भूतपूर्व आनंद में हैं। उनका कहना है कि हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री हमारे साथ खाना खाएंगे। लेकिन आज यह हुआ है।

उन्होंने इस परियोजना में कार्य करने वाले मजदूरों पर उनके कार्य के लिए आभार व्यक्त करने के लिए गुलाब की पंखुड़िया बरसाई। वह समूह तस्वीर के लिए उनके साथ बैठे। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह के कार्यों में लगे मजदूरों का प्रधानमंत्री ने सम्मानित किया है। बताया जा रहा है कि विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद प्रधानमंत्री सीधे मजदूरों के बीच पहुंचे। उनसे प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत की और उनका हालचाल जाना। बताया यह भी जा रहा है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण में करीब 2300 मजदूर लगे हुए थे और आज वह विशेष मेहमान के तौर पर कार्यक्रम में मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने जब मजदूरों के साथ फोटो खिंचवाए, उनके चेहरे खिल उठे। इस दौरान मजदूरों ने हर हर महादेव के नारे लगाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की।

इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी के अस्सी घाट पर स्वच्छता अभियान में लगे सफाई कर्मचारियों के पैर धोए थे और उनका आशीर्वाद लिया था। वहीं मोदी ने कहा कि यहां आकर किसी को भी गर्व महसूस होगा, यह प्राचीनता व नवीनता का समागम है। मोदी ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर अब पहले के तीन हजार वर्ग फुट के मुकाबले पांच लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है, यहां एक साथ50 से 75 हजार श्रद्धालु आ सकते हैं। काशी विश्वनाथ धाम परियोजना करीब पांच लाख वर्ग फीट में फैली हुई है और गंगा नदी को काशी विश्वनाथ मंदिर से जोड़ती है और इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए कई सुविधाओं का विकास किया गया है।

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