कोरोना कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप पर एप्पल और गूगल नहीं करेंगे यूजर्स की लोकेशन ट्रैक, सिर्फ ब्लूटूथ से करेगी संचालन

नई दिल्ली। वैश्विक कोरोना महामारी से निपटने के लिए विश्व के तमाम देश प्रयासों में जुटे हुए हैं। इतना ही नहीं तकरीबन हर एक बड़े देश ने कोरोना वायरस के मरीज को डिटेक्ट करने के लिए ऐप भी लॉन्च की है। जिसको वहां के नागरिकों को डाउनलोड करना अनिवार्य है। इस ऐप के जरिए जानकारी प्राप्त होती हैं कि आपके आस-पास कोरोना संक्रमित कोई मरीज है या फिर नहीं…

ठीक इसी को ध्यान में रखते हुए टेक कम्पनी एप्पल और गूगल भी ऐप बना रही है। हालांकि वह अपने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप में लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक लगाने जा रही है। सोमवार को इस बात की जानकारी देते हुए कम्पनी ने कहा कि हम दोनों कंपनियां मिलकर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग सिस्टम पर काम कर रही हैं, जिससे कोरोना संक्रमित व्यक्ति को ट्रैक किया जा सकेगा। इन कम्पनियों का मानना है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति को ट्रैक करने वाले कई सारे ऐप आज कल बनाए जा चुके हैं। जिनके इस्तेमाल से यूजर्स की प्राइवेसी को खतरा है। ऐसे में कम्पनी सिर्फ ब्लूटूथ की मदद से ऐप का संचालन करेगी।

कम्पनियों ने ऐप के GPS को बैन करने का फैसला लिया है। कम्पनियों ने यह फैसला यूजर्स की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए लिया है। ज्ञात हो कि दुनिया के 99 फीसदी स्मार्टफोन में ऐपल और गूगल के ऑपरेटिंग सिस्टम मौजूद हैं और अब कम्पनियों ने कहा कि कोरोना कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप के लिए ऐप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) हर देश के लिए एक ही होगा। ताकि ऐसे ज्यादा ऐप्स न बनाए जा सकें जो प्राइवेसी के लिए खतरा हैं।

सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को आरोग्य सेतु (Aarogya Setu) ऐप डॉउनलोड करना जरूरी है। ताकी उनके आस-पास यदि कोरोना संक्रमित व्यक्ति है तो उन्हें उसकी जानकारी मिल सके। ब्लूटूथ और GPS की मदद से आरोग्य सेतु ऐप काम करता है।

ऐप हर 15 मिनट में यूजर्स का लोकेशन डेटा एकत्र करता है और फिर उसे स्टोर करता है। इसके बाद जब किसी व्यक्ति में कोरोना के संक्रमण मिलते हैं तो उसके लोकेशन को अपलोड किया जाता है।

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