सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को 7 दिन होम क्वारंटाइन, 8वें दिन RT-PCR ज़रूरी

नई दिल्ली। भारत ने सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के आगमन पर सात दिनों के लिए घर पर पृथकवास में रहना और आठवें दिन आरटी-पीसीआर जांच कराना अनिवार्य कर दिया है। इस सलसिले में संशोधित दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। शुक्रवार को जारी दिशानिर्देश 11 जनवरी से प्रभावी होंगे और अगले सरकारी आदेश तक प्रभावी रहेंगे। कोरोना वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप का पता चलने के बाद वैश्विक स्तर पर कोविड के मामले बढ़ने के मद्देनजर नया आदेश जारी किया गया है। हम आपको बता दें कि इससे पहले, जोखिम वाले देशों के रूप में सूचीबद्ध देशों से आने वाले यात्रियों को आगमन के बाद हवाई अड्डे पर कोविड-19 जांच करानी होती थी और उन्हें बाहर निकलने या गंतव्य के लिए अगली उड़ान पर सवार होने से पहले वहां अपने जांच के नतीजे के लिए इंतजार करना होता था। जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने पर उन्हें सात दिनों तक घर पर पृथक रहना पड़ता था और आठवें दिन आरटी-पीसीआर जांच करानी होती थी।

दूसरे देशों से भारत आने वाले यात्रियों के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है। अंतर्राष्ट्रीय यात्री अगर देश में आते हैं तो उन्हें सात दिन के लिए होम क्वारंटाइन होना पड़ेगा। इस अवधि में ये यात्री इधर उधर नहीं घूम सकते हैं, उन्हें घर में ही रहना होगा। 7 दिन तक होम क्वारंटाइन में रहने के बाद आठवें दिन RT-PCR टेस्ट कराना ज़रूरी होगा। ये नई गाइडलाइन 11 जनवरी से लागू होगी।

भारत में कोरोना की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोरोना की गंभीर स्थिति के मद्देनज़र ये निर्णय हुआ कि विदेश से आने वालों को तुरंत ही बाहर निकलने या इधर उधर घूमने की परमीशन नहीं होगी। उन्हें पहले होम क्वारंटाइन में रहना होगा। इसके आठ दिन बाद RT-PCR टेस्ट कराना ज़रूरी होगा। RT-PCR टेस्ट इसलिए ताकि यात्री की स्वास्थ्य स्थिति का पता चल सके कि कहीं भी कोरोना पीड़ित तो नहीं।

बता दें कि भारत में अब 24 घंटे में एक लाख कोरोना के मामले आने लगे हैं। सात महीने बाद ये पहला मौका है जब एक दिन में एक लाख मामले सामने आये हैं। भारत में संभावित कोरोना वायरस (Corona Virus) की तीसरी लहर आ चुकी है। दिल्ली, महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में हालात बेहद खराब हैं। बढ़ते संक्रमण के बीच विदेशों से आ रहे यात्रियों से भी संक्रमण और फैल सकता है, इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने ये फैसला किया है।

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