क्या वैश्विक महामारी कोरोना की आड़ में विश्व की कई सरकारें कर रही मनमानियां ? अभिव्यक्ति और प्रेस की आजादी पर भी खतरा

नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना की मार दुनिया का लगभग हर एक देश झेल रहा है। जिसको रोकने को लिए सरकारों ने लॉकडाउन जारी किया और लोगों को सामाजिक दूरी का पालन करने का निर्देश भी दिया। इसी बीच कोरोना की आड़ में सत्ता के शीर्ष पर बैठे कुछ नेताओं ने असीमित अधिकारों का इस्तेमाल भी किया। जिन पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार कोरोना की आड़ में सत्ता की पकड़ मजबूत करने में जुटी हुई है।

तुर्की ने सोशल मीडिया पोस्ट के लिए सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। रूस ने साफ शब्दों में कहा था कि फ़ेक न्यूज मानी जाने वाली किसी भी चीज के लिए लोगों को जेल भेजा जा सकता है। जॉर्डन ने कहा कि उन लोगों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी जो लोग अफवाह या झूठी खबरों या फिर तथ्यों को तोड़मरोड़कर पेश करेंगे।

इजरायल ने तो फोन डेटा की निगरानी करने के आदेश दे दिए। हंगरी में नया कानून लागू किया गया। ब्रिटेन ने मंत्रालयों को नए अधिकार दे दिया। जिसके बाद आलोचक अब इन सरकारों की आलोचना कर रहे हैं।

हंगरी पर आरोप लग रहे हैं कि वह संकट के समय देश को एकजुट करने की जगह पर कोरोना को इस्तेमाल कर अपनी शक्तियां बढ़ा रहा है। कोरोना का डर दिखा कर लोकतंत्र का खात्मा किया गया। यहां की संसद ने कोरोना को लेकर एक बिल पास किया। इस बिल के तहत ही प्रधानमंत्री को हमेशा सत्ता में बने रहना का अधिकार प्रदान किया गया है। बता दें कि प्रधानमंत्री विक्टर ओरबन की पार्टी का संसद में दो तिहाई बहुमत है और उन्होंने इसी महीने इमरजेंसी भी घोषित की है।

कोरोना महामारी के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याडू ने सुरक्षा एजेंसी को फोन डेटा की निगरानी करने का आदेश दे दिया है। दरअसल, यह व्यवस्था काउंटर टेरिरिज्म के लिए लागू की जाती है लेकिन अब इससे लोगों की निगरानी की जाएगी।

इसके पीछे कोरोना वायरस से बचाव का तर्क दिया जा रहा है। इतना ही जो लोग आइसोलेशन के आदेश का उल्लंघन करेंगे उन्हें 6 महीने के लिए जेल में डाला सकता है।

थाईलैंड में जो कोई भी सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहा है उसे प्रताड़ित करने की बातें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यहां के प्रधानमंत्री प्रयुत चान ओचा को कर्फ्यू और मीडिया पर सेंसरशिप का विशेषाधिकार मिला है।

ठीक यही हाल ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, बोलीविया और फिलीपीन का भी है। यहां पर आलोचकों द्वारा सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर अपनी ताकत बढ़ाने में जुटी हुई है।

पत्रकारों की स्वतंत्रता एवं सूचना के अधिकार की रक्षा के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन ‘रिपोटर्स विदआउट बॉर्डर्स’ ने आगाह किया है कि कोरोना वायरस महामारी दुनिया भर में प्रेस की आजादी के लिए खतरा पैदा कर रही है। वैश्विक मीडिया स्वतंत्रता के अपने वार्षिक मूल्यांकन में समूह ने चेताया था कि सरकारें इस स्वास्थ्य संकट को बहाना बना सकती हैं और सामान्य समय में उठाए न जा सकने वाले कदम उठाने के लिए इस बात का लाभ उठा सकती हैं कि राजनीतिक गतिविधियां नहीं हो रही हैं, जनता परेशान है और प्रदर्शनों का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

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